लोग कहते हैं की मन की गति बड़ी तेज होती है,जाने कितनी दूरियां पल भर में तय करने की सामर्थ्य है इसमें,फिर चाहे बात चाँद सितारों की हो या किसी के मन के भावों को बिना बोले पढ़ लेने की और कमाल की बात है ये खासियत सबके पास है............विरोधाभासी दिशाओं में भी ऐसे विचरण कर लेता है कि लगता नहीं कि एक ही है ये .कभी ऐसा प्रतीत होता है ना कि मानो 'ईश्वर' ने मन रूपी अवतार लिया हो,तभी तो एक साथ इतनी जगह हो सकता है,नहीं तो किसी लौकिक शक्ति की क्या सामर्थ्य .........तो क्या मन अलौकिक है ?या ये कहा जाए ईश्वर ने अपना दिव्यांश दिया है मन के रूप में,और कोशिश छोड़ दी गयी हम पर उसे अंश से पूर्णता देने की.
सारिका आशुतोष मूंदड़ा
बेहतरीन
ReplyDeleteबेहतरीन
ReplyDeleteThanku
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