#रामराज्य का सपना अर्थात एक ऐसे आदर्श की कल्पना , जहाँ हर व्यक्ति के चित्त में मर्यादा का वास हो , स्वआचरण पर पैनी दृष्टि हो , स्वविश्लेष्ण हो | मगर आज हम राम की इसी भूमि पर राम के आचरण पर प्रश्न खड़ा करते हैं | विशेषकर सीता के परित्याग वाला प्रसंग ..... इसे सम्पूर्ण स्त्री जाति के साथ अन्याय का प्रतीक मान कर तौला जाता है | पता नहीं क्यों मेरे मन में राम के सीता के साथ व्यवहार को लेकर कभी भी संशयात्मक वृत्ति नहीं रही | जब #आशुतोषराना जी की किताब #रामराज्य को पढ़ा तो अपने मन के विचारों का दर्पण ही महसूस किया | सीता का परित्याग करते समय राम की विवशता .....उनका अंतर्द्वंद |
क्यों राम ने मृत्युदंड ना दे दिया धोबी को ?
क्यों राम सीता के साथ नहीं चले गए ?
राम के ह्रदय में भी ये विचार आये , मगर उन्होंने वो रास्ता चुना कि सीता की पवित्रता को लेकर उठते प्रश्न सदा - सदा के लिए समाज में विराम पा गये |
स्वयं के साथ अन्यायी होकर भी, सीता को उसके मान के साथ प्रतिष्ठित बनाये रखने वाले राम को समझने के लिए राम की दृष्टि से सोचना होगा |
वर्तमान परिवेश में जहां तार्किकता और आस्था के द्वन्द विद्यमान है , वहां रामायण को तार्किक शक्ति के साथ , आस्था की धरोहर के रूप में प्रस्तुत करने के लिए, आपको साधुवाद |
इस पुस्तक के सौन्दर्य पक्ष कई है -- प्रत्येक चरित्र का सकारात्मक पक्ष , भाषा सौन्दर्य , दर्शन शास्त्र , भारतीय संस्कृति के सिद्धांत ...वर्तमान समय के इस संवेदनहीन वातावरण में तो और भी प्रासंगिक |#कैकयी -राम , #सीता- राम , #शूर्पनखा-सीता , #रावण - मंदोदरी , #विभीषण -राम आदि के मध्य संवाद मंत्रमुग्ध भी करते हैं और चिन्तन की ओर प्रवृत्त भी करते हैं |
हमारी संस्कृति में शब्दों को ब्रह्म कहा गया है , क्यों कहते हैं , कितना सही तरीके से इनका प्रयोग करना चाहिए , ये इस उपन्यास की ऐसी निधि है,जिसे पढ़ते समय पाठक अपने ह्रदय में सिर्फ अनुभूत कर सकता है |
वे चिंतन पक्ष जो अधिकांशत : विवाद के क्षेत्र में रहते हैं , उन पर ही यहाँ कलम उकेरी गयी है |
'कैकयी द्वरा राम को वनवास' इस प्रकरण के आते ही रामायण नया मोड़ तो प्राप्त करती है ही , साथ ही कैकयी का व्यक्तित्व सिर्फ उन दो वचनों में सिमट कर रह जाता है | कैकयी की एक नयी छवि से मिलना अत्यंत सुखकर होगा |
राम को ईश्वर , दशरथ- नंदन की छवि में हमने स्वीकार किया है , मगर राम को विचार के रूप में स्वीकारना अभी शेष है | राम के विचारों का स्वरूप , जीवन लक्ष्य के प्रति स्पष्टता उनके सम्पूर्ण जीवन में प्रतिबिंबित होते हैं | उन्हीं विचारों का परिचय है -- #कैकयी-राम संवाद | आगे के सारे दृश्य उन विचारों का क्रियान्वयन ...
सारे प्रसंग अत्यंत सुंदर , जीवन्तता लिए हुए ....सुपर्णा/शूर्पणखा आदि जिन्हें पढकर ही महसूस किया जा सकता है |
पर एक अन्य पक्ष जिस पर बात करना चाहूंगी वो है प्राचीन समय का विज्ञान , जिसके लिए सदैव ही ये कहा जाता है , माना जाता है कि वो वर्तमान समय से भी अधिक उन्नत था| रामायण में विमान की बात हो या संजीवनी बूटी का ज्ञान ....इस ओर हमारा ध्यान ले जाते है | #कुम्भकर्ण के व्यक्तित्व और उसके अंत का चित्रण, में भी विज्ञान के उस रूप के दर्शन हम कर सकते हैं |
साहित्य का कार्य है - खोते हुए जीवन मूल्यों को बचाने की दिशा में प्रयासरत रहना | जन -जन की आस्था के केन्द्रों पर अगर तर्क, संशय की स्थिति उत्पन्न करे तो उनके उत्तरों को तर्क से ही दिया जाय , मगर इस सम्पूर्ण प्रक्रिया में ये भी ध्यान रखा जाए कि जो भी रचा जाये , उसमें समाज का उत्थान हो , सकारात्मक दिशा का प्रावधान हो | इस पुस्तक ने निश्चित रूप से इस कार्य को साकार किया है |
राम- रावण के मूल्यांकन की बारीकियों को उकेरती इस पुस्तक को पढ़ना अपने भीतर एक #उत्सव को मनाने जैसा है , सही मायनों में #दशहरे का पर्व मनाने जैसा |