Friday, April 18, 2014

यूँ लगता है अब...........














जाने कितने एहसासों में,
खिलता है ये जीवन
इन भावनाओं के पुष्पों में
तुम्हारी सुगंध का ये कैसा रिश्ता है...........
कभी संवरती,कभी बिखरती
इस अविरल यात्रा में,
तुमसे शायद
मुस्कान और दर्द का रिश्ता है
आशा-निराशा के भंवर में,
जब झूलती है नैय्या
तब तुमसे शायद ,
उम्मीद के तिनकों का रिश्ता है
कभी देखा नहीं तुम्हे,
और एक छवि सी उभरी है
मन के नैनों का, तुम पर........
विशवास का ये, कैसा अजब सा रिश्ता है
नक़्शे तो सब अधूरे से,
तुम तक आती राहों के,
यूँ लगता है अब,
हर दिशा का बस तुमसे रिश्ता है

सारिका आशुतोष मूंदड़ा

Saturday, April 5, 2014

जीवन २ .................

असंख्य,अद्वितीय किरदार युक्त कथा
हर शक्ल जुदा,हर शख्सियत जुदा
हर किरदार कथा कहता सा.......
आस्तिक-नास्तिक,संस्कार,विश्वास,
सुख-दुःख,मान-अपमान,
उड़ानों और सीमाओं की
स्वपरिभाषा गढ़ते हुए..................
क्रोध,तृष्णा,जलन पिपासा
दया,क्षमा,मोह ममता
प्यार, नफरत,आशा-निराशा
जाने कितने बंधनों में जकड़े हुए.............
कर्मफल -बीज को अंकुरित करते हुए
प्रति पल कुछ पाते हुए,कुछ खोते हुए
सबकी अपनी यात्रा
अपना-अपना सफ़र,मगर............
मगर,एक ही मंजिल पर बढ़ते हुए
निज अस्तित्व की कहानी रचते हुए
अनुभव-यात्रा समापन कर शुन्य से एकाकार होते हुए
                                             
                                                  [ लगातार ]
सारिका आशुतोष मूंदड़ा

Thursday, April 3, 2014

जीवन.............

दुनिया..........
जिंदगी.........
जीवन................एक सिनेमा
एक या अनेक .............
रोचक या नीरस
कैसी कहानी
या कितनी कहानियाँ लिखी है
कथाकार ने............
और क्या ये  सब मिल कर
कहीं फिर,
निर्मित हो रही एक नयी कहानी
ना उत्पत्ति का पता
न अंत का........
विलीनता भी है आगमन भी
दुःख भी,उल्लास भी
कई रोचक घटनाक्रम भी
सतत प्रवाहमान कथा...............

                         [लगातार ..].
सारिका आशुतोष मूंदड़ा