असंख्य,अद्वितीय किरदार युक्त कथा
हर शक्ल जुदा,हर शख्सियत जुदा
हर किरदार कथा कहता सा.......
आस्तिक-नास्तिक,संस्कार,विश्वास,
सुख-दुःख,मान-अपमान,
उड़ानों और सीमाओं की
स्वपरिभाषा गढ़ते हुए..................
क्रोध,तृष्णा,जलन पिपासा
दया,क्षमा,मोह ममता
प्यार, नफरत,आशा-निराशा
जाने कितने बंधनों में जकड़े हुए.............
कर्मफल -बीज को अंकुरित करते हुए
प्रति पल कुछ पाते हुए,कुछ खोते हुए
सबकी अपनी यात्रा
अपना-अपना सफ़र,मगर............
मगर,एक ही मंजिल पर बढ़ते हुए
निज अस्तित्व की कहानी रचते हुए
अनुभव-यात्रा समापन कर शुन्य से एकाकार होते हुए
[ लगातार ]
सारिका आशुतोष मूंदड़ा
हर शक्ल जुदा,हर शख्सियत जुदा
हर किरदार कथा कहता सा.......
आस्तिक-नास्तिक,संस्कार,विश्वास,
सुख-दुःख,मान-अपमान,
उड़ानों और सीमाओं की
स्वपरिभाषा गढ़ते हुए..................
क्रोध,तृष्णा,जलन पिपासा
दया,क्षमा,मोह ममता
प्यार, नफरत,आशा-निराशा
जाने कितने बंधनों में जकड़े हुए.............
कर्मफल -बीज को अंकुरित करते हुए
प्रति पल कुछ पाते हुए,कुछ खोते हुए
सबकी अपनी यात्रा
अपना-अपना सफ़र,मगर............
मगर,एक ही मंजिल पर बढ़ते हुए
निज अस्तित्व की कहानी रचते हुए
अनुभव-यात्रा समापन कर शुन्य से एकाकार होते हुए
[ लगातार ]
सारिका आशुतोष मूंदड़ा
बहूत खूब
ReplyDeleteबहूत खूब
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