Thursday, April 3, 2014

जीवन.............

दुनिया..........
जिंदगी.........
जीवन................एक सिनेमा
एक या अनेक .............
रोचक या नीरस
कैसी कहानी
या कितनी कहानियाँ लिखी है
कथाकार ने............
और क्या ये  सब मिल कर
कहीं फिर,
निर्मित हो रही एक नयी कहानी
ना उत्पत्ति का पता
न अंत का........
विलीनता भी है आगमन भी
दुःख भी,उल्लास भी
कई रोचक घटनाक्रम भी
सतत प्रवाहमान कथा...............

                         [लगातार ..].
सारिका आशुतोष मूंदड़ा

No comments:

Post a Comment