Thursday, October 15, 2020

जो तुम आ जाते एक बार

 महादेवी वर्मा की बहुत खूबसूरत कविता है, इस शीर्षक से....मुझसे बस ऐसे ही कुछ रचित हो गया। कभी - कभी विचार ठहर जाते हैं... आप कुछ लिखना चाहते हैं मगर सब शून्य..... विचारों और कलम की ये शून्यता... दूर हो जाती, जो तुम आ जाते एक बार.. सोचेंगे विचार शून्यता में भी कितना विचार... 🙂🙂

शब्द सारे हुए उपद्रवी 

कलम दिखाए नखरे हजार 

शब्दों को मिलता उल्लास 

जो तुम आ जाते एक बार.... 

अटका हुआ है गीत कोई 

धुन जैसे हो सोई- खोई, 

गान सहज होता साकार 

जो तुम आ जाते एक बार... 



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