महादेवी वर्मा की बहुत खूबसूरत कविता है, इस शीर्षक से....मुझसे बस ऐसे ही कुछ रचित हो गया। कभी - कभी विचार ठहर जाते हैं... आप कुछ लिखना चाहते हैं मगर सब शून्य..... विचारों और कलम की ये शून्यता... दूर हो जाती, जो तुम आ जाते एक बार.. सोचेंगे विचार शून्यता में भी कितना विचार... 🙂🙂
शब्द सारे हुए उपद्रवी
कलम दिखाए नखरे हजार
शब्दों को मिलता उल्लास
जो तुम आ जाते एक बार....
अटका हुआ है गीत कोई
धुन जैसे हो सोई- खोई,
गान सहज होता साकार
जो तुम आ जाते एक बार...
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