आ ही जाते हैं ,
चाहे-अनचाहे .........
कितना शोर किया करते हैं
मुक्त करने की,
कोशिश में.............
और जकड़ा करते हैं
कैसे विहंग है,
जो बंधन में.............
सुख समझा करते हैं
यादों के पखेरू
अक्सर उड़ान
मेरे इर्द-गिर्द भरा करते हैं
सारिका आशुतोष मूंदड़ा
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