तिमिर भरे मन में ,
आस -दीप जुगनू बने
विशवास हुआ खंड-खंड,
पुनः वो टुकड़े जुड़े
उजड़े घोसले को जैसे,
ख्वाब के तिनके सिले
नया गीत लिखने,
शब्दों के धुंधले अक्स मिले
एक प्रार्थना अधरों पर,
सबको तेरा साथ मिले
जुगनू शक्ल ले लौ की
विश्वास को सम्बल मिले
ख्वाब रंग ले हकीकत का,
धुंधलाहट को रोशनी दिखे
सारिका आशुतोष मूंदड़ा
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