Tuesday, February 9, 2021

जिंदा कहानियां ( शशिकला राय ) पुस्तक विमर्श, संक्षिप्त विचार

 आदरणीया शशिकाला राय द्वारा  लिखित पुस्तक पढ रही थी 

'ज़िन्दा कहानियाँ' ....हाँ ज़िन्दा आज और आने वाले कल की कहानियॉ जो  किसी परी लोक की सैर नहीं करायेगी वरन टटोलेगी हमारी ज़िजीविषा को ,और धिक्कारेगी इसे तुम तकलीफ कहते हो ।

संक्षिप्त मे कहूँ तो इसमे ज़िन्दा दर्दनाक परिस्थितियों से  गुजरते 12 जीते - जागते किरदार हैं ,कुछ नाम है  सिंधु ताई सपकाल ,राजश्री नागरेकर ,सुनीता ताई , नसीमा । इन सब चरित्रों को पढकर ,जानकर  इनके परिवेश  मे झांक कर पता पड़ता है , हमारे भीतर समायी अकूत शक्ति का ,जब खुद का ही जीवन संघर्षों के  दबाव तले सांस लेने को तरस रहा हो तब औरों को जीवन देना... ये अकूत शक्ति ही तो है ,अपनी परिस्थिति के एहसास की उस  नमी ,उस आँच को सहेजना और सोचना कि मै कितनों को इस आग  मे झुलसने से  बचा लूँ , और इस  सब के बीच  लेखिका की लेखनी  पूछती है कुछ सवाल स्वयं  से , इस देश के इज्जतदार  साफ- सुथरे समाज से .....और सच संवेदनाओं ,सहानुभूतियो की चरम  अनुभूति के कृत्य भी आपको लजा  देंगे ,अगर लगता है कि नही... तो पहले  इससे गुजरना  होगा ,देने होंगे उत्तर ..मगर  झुकी होगी पलकें ...धिक्कार रहा होगा मन , टटोलिये कि  कैसा - कैसा हो सकता है जीवन... ? क्या  होती है स्वतंत्रता  या कि अनुमान लगाईये लावनी करती नृत्यांगना के दर्द की भंगिमाओं का.... देखिये कैसी ज़िजीविषा के गर्त से  मेरा भारत पंख फैलाने  की तैयारी  कर रहा है ....

 पैर धंसे है दलदल मे तो क्या ...?

चिन्दि - चिन्दी है वजूद तो क्या ...?

काट दिये हैं पंख मेरे तो क्या ...?

 मै फिर भी उड़ने के स्वप्न देखता  हूँ !


सच वो एक एहसास ही तो है जो सब कुछ है.... जीवन भी और गति भी ......

ज़रूरी है एहसासों मे, 

नमी  और आँच रखना ..

ताकि ख्वाब के बादल ,

साकार करे अस्तित्व अपना 

परखने को अस्तित्व फिर, 

बंजर भूमि पर नजर रखना 

ज़रूरी है एहसासों मे, 

नमी और आँच रखना 


कुछ ऐसी ही हैं ये शख्सियतें ,क्या कर गुजरे उसका भान नही ,मान नही , कितना कुछ बाकी है निगाहें  बस वही पर जाती हैं । धन्यवाद मैम आपको ,ऐसी पुस्तक लिखने के लिए ,जहाँ एक साथ बहुत  कुछ है ...साक्षात्कार, जीवन यात्रा, कहानी ,आपकी विवशता ,कई साहित्यकारों के प्रसंगात्मक संदर्भ ,हमारे राष्ट्र के लिए कई सवाल और साहित्य जगत के लिए खरे  मायनों मे समाज की तस्वीर प्रस्तुत करता एक दस्तावेज ...


सारिका आशुतोष  मूंदड़ा

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